'गिरफ्तार हों भागवत'

'गिरफ्तार हों भागवत'

पत्रकारों के लिए एक बड़ी खबर है। बहुप्रतीक्षित मजीठिया वेजबोर्ड की सिफोरिशों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकारों औऱ गैर पत्रकारों और न्यूज 
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नई दिल्ली| भारत में साल 2007 के समझौता एक्सप्रेस में जो ब्लास्ट हुआ था उनकी जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को थी| इस बात का खुलासा होते ही कांग्रेस, सपा, बसपा और जेडीयू ने आरएसएस पर हमला बोल दिया है। हालांकि संघ ने असीमानंद के तथाकथित इंटरव्यू को ही फर्जी करार दिया है साथ ही इसे कांग्रेस का चुनावी हथकंडा करार दिया है| संघ नेता राम माधव ने कहा कि इस प्रकार के आरोप पहले भी लगाए गए हैं। आरोप निराधार हैं और संघ को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

इस मामले में केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने मोहन भागवत को गिरफ्तार करने की मांग की है| उन्होंने कहा कि इन्हें शर्म आनी चाहिए| वोट के लिए वे इस तरह के काम करते हैं| वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने केंद्र से इस संबंध में सीबीआई जांच की मांग की है| जेडीयू नेता अली अनवर ने कहा कि आरएसएस की यही फितरत और विचारधारा है। उन्होंने कहा कि भागवत पर इस आधार पर मुकदमा होना चाहिए। आरजेडी ने सख्त तेवर दिखाते हुए मोहन भागवत को बिना जांच किए तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। अरजेडी ने कहा कि भागवत की साजिश साफ नजर आती है और उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए।

गौरतलब है कि समझौता एक्सप्रेस के हमले के आरोपी असीमानंद ने 'कैरावैन' मैगजीन को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि भारत में साल 2007 के समझौता एक्सप्रेस में जो हमले हुए थे, उनकी जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को थी| इतना ही नहीं मुस्लिम इलाकों में जो भी धमाके हुए हैं उसकी मंजूरी भी खुद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दी थी|

हालांकि असीमानंद के वकील का कहना हैं कि मेरे मुवक्किल से ऐसा कोई इंटरव्यू नहीं लिया गया। वहीं दूसरी ओर संघ भी असीमानंद से बातचीत के अंश को फर्जी करार दे रहा हैं| मैगजीन ने इस स्टोरी को कवर बनाया हैं| साथ ही मैगजीन यह भी कहती हैं कि उसने इस स्टोरी के लिया बहुत शोध किया और दो साल में तकरीबन चार पांच बार आरोपी असीमानंद से बातचीत की| मैगजीन ने असीमानंद से बातचीत के टेप्स भी जारी किए हैं।

मैगजीन की ओर से इंटरव्यू करने वाली महिला पत्रकार लीना गीता रघुनाथ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है- "असीमानंद ने मुझे एक मीटिंग के बारे में बताया जो सूरत में आरएसएस के अधिवेशन के बाद कथित तौर पर जुलाई 2005 में हुई| आरएसएस के सम्‍मेलन के बाद मोहन भागवत और इंद्रेश कुमार सूरत से दो घंटे की दूरी पर डांग (गुजरात) के एक मंदिर में गए जहां असीमानंद रहते थे, मंदिर से कई किलोमीटर दूर एक तंबू में भागवत और कुमार ने असीमानंद और उनके सहयोगी सुनील जोशी से मुलाकात की|

जोशी ने भागवत को मुस्लिम इलाकों में बम धमाकों की योजना की जानकारी दी| असीमानंद के मुताबिक दोनों संघ नेताओं ने बम धमाकों की मंजूरी दी और भागवत ने कहा, आप सुनील के साथ ये काम करें... हम शामिल नहीं होंगे, लेकिन आप इसे कर रहे होगे तो यह समझना कि हम आपके साथ हैं|" उधर, आरएसएस चिंतक विराग पाचपोर ने कैरावन मैग्जीन में छपे स्वामी असीमानंद के इंटरव्यू को फर्जी करार दिया है। उन्होंने कहा कि ये इंटरव्यू पूरी तरह झूठ और फरेब है, जिसका कोई आधार नहीं है। उन्होंने इंटरव्यू के टेप रिकॉर्ड वाली बात पर भी सवाल उठाए हैं। पाचपोर ने कहा कि इस तरह जेल में जाकर कोई इंटरव्यू कैसे कर सकता है।
Posted by jasika lear, Published at 01.07

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