एस.पी और कलेक्टर ऑफिस एवं निवास से कुछ कदम की दूरी पर शराब की बिकवाली?

एस.पी और कलेक्टर ऑफिस एवं निवास से कुछ कदम की दूरी पर शराब की बिकवाली?


मुरली के ढ़ाबे में बेची जाती है 
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कटनी से लखन लाल की रिपोर्ट...(टाइम्स ऑफ क्राइम) 

कटनी. वैसे तो पूरे जिले में अवैध शराब की बिकवाली जोरों से चल रही है तथा पूरा प्रशासन अंधा बना हुआ है। जनता समझ नहीं पा रही है कि आखिर क्या कारण है कि आबकारी एवं नगर की पूरी पुलिस मौन बन कर केवल तमाशा देख रही है। कहीं अन्य जगह अगर अवैध शराब बेची जा रही हो तो बात समझ में आती है कि यह शराब किसी ठेकेदार के द्वारा ज्यादा धन कमाने के चक्कर में बिकवाई जा रही है। किन्तु यहां तो आला अधिकारियों के ऑफिस एवं निवास से चंद कदम के दूरी पर मुरली का ढ़ाबा में खाने की जगह दिन-दहाड़े शराब अपने अहाते के अंदर बैठा के पिलाई एवं बेची जाती है। किन्तु हमारे एस.पी साहब तथा कलेक्टर साहब को शायद इसकी जानकारी नहीं है। जब इस ढ़ाबा के  संचालक मुरली से यह बात पूंछी गई तो संचालक ने बड़ा अटपटा सा जवाब देते हुये कहा की आपके समाचार छापने से कुछ नहीं होता। ढ़ाबे के संचालक तो यह तक कह डाला की हम तो अपने महीने की इनकम से थाना माधव नगर प्रभारी को महीने की रकम पहुॅंचाते हैं। तथा इस नाके के बीट प्रभारी तो यहीं आकर खाना खाते हैं और शराब पी कर चले जाते हैं।

परोसी जाती है खाने के जगह राशि की थाली 

सूत्र बताते हैं कि जब थाना माधव नगर में श्री मान मिथलेश तिवारी प्रभारी थे उसे समय हमारे उप-नगरी माधव नगर में जुआं, सट्टा, शराब, तथा गुड़ों के हालात इतने बुरे थे की अवैध काम करने वालों के हौंसले पशत हो गये थे। मुरली ढ़ाबा में टीआई ने छापा मारा था उस वक्त लाखों की शराब पकड़ी गई थी और ढ़ाबे के संचालक ने अपनी काफी नेता गिरी की धोंस दिखाई थी किन्तु इन महाशय की एक नहीं चल पाई थी और जब तक श्री मान तिवारी जी थे उनके रहते मुरली ढ़ाबे से अवैघ रूप से शराब की बिकवाली बंद हो गई थी। ढाबे के संचालक की नेतागिरी धरी के धरी रह गई थी। किन्तु जैसे ही पूर्व थाना प्रभारी के जाने की सूचना ढ़ाबा के संचालक को लगी वो तुरन्त मंदीर में नारियल चढ़ाने पहूंच गये उसके बाद थाना प्रभारी प्रजापति जी आये और थाना प्रभारी का थाली वाला सिस्टम चालू कर दिया गया। वही थाली वर्तमान में बैठे थाना प्रभारी को भी परोसी जाती है। जिससे मुरली के ढ़ाबे में बेखौफ शराब दिन-दहाड़े पिलाई एवं बेची जाती है। 

सही छबि को कर रहे बदनाम

साफ-सुथरी छवि वाले एस.पी होने के बावजूद पुलिस विभाग के कुछ अन्य कर्मचारी इनकी छवि बिगाडऩे में तुले हुये हैं। जैसा कि मुरली ढ़ाबा में खाना के साथ-साथ शराब पिलाई एवं बेची जाती है। वो भी आला अधिकारियों के नाक के नीचे और उन्हें पता भी नहीं है। क्योंकि अपने कप्तान को कमाई के ठीहे के बारे में बता भी नहीं सकते यहीं बजह की आला अधिकारियों की छबि भी बिगड़ती है। नगर तो वैसे अवैध कारोबार से पाटा जा रहा है ताकी अन्य थानों की कमाई भरपूर होती रहे और प्रभारियों की अपनी जेबें गरम होती रहे। जब कभी ऐसा होता की प्रभारियों की करतूत इनके कप्तान को किसी अन्य के द्वारा  खबर लगती है। तब तो प्रभारियों की  कार्यशैली  देखने लायक रहती है। अपनी छबि साफ बनाने के लिए जो एक्ट लगना चाहिए वो नहीं लगाया जाता जबकि ऐसा रोजनामचे में  लिखा जाता है कि मुजरिम बने व्यक्ति का जीवन ही बरबाद हो जाये।   

आबकारी बना दलाल

आबकारी विभाग तो अपनी जुम्मेदारी ही भूल गया है। आबकारी के अधिकारी डीओ एवं ए.डीओ को जब कभी इस प्रकार की कोई जानकारी दे कर उनसे पूंछा जाता है तो उच्च पद पर बैठे ये अधिकारी एक ही जवाब देते हैं कि आखिर हम कहां-कहां ध्यान दे हमारे पास सिपाहियों एवं कर्मचारियों की कमी का रोना रो कर अपनी बलाये टालते रहते हैं। पब्लिक तो यह कहती है कि आबकारी के जितने भी अधिकारी हैं। वो या तो बिक चूके हैं या फिर इन ठेकदारों के गुलाम बन कर सिर्फ दलाली करना जानते हैं। यही कारण है कि नगर में अवैध रूप से शराब की बिकवाली हर ढ़ाबों एवं होटलों में आये दिन देखने को मिलती है। नगर की पुलिस कुछ हद तक अपना काम तो करती हैैै। किन्तु आबकारी खुले रूप से इनकी गुलामी एवं दलाली करने पर उतारू है। आप को आगे अन्य जगह की जानकारी के साथ। देखें आबकारी कितना अपना कर्तव्य निभाती है या फिर दलाल ही बने रहना पसंद करेगें।च
Posted by jasika lear, Published at 06.08

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