ईसाई अल्पसंख्यकों की उपेक्षा कर रही है सरकार

ईसाई अल्पसंख्यकों की उपेक्षा कर रही है सरकार

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ 
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दिल्ली के ईसाई समाज द्वारा बुधवार को वाईएमसीए आडिटोरियम में अपने समाज के सामने आ रही चुनौतियों व विकास की संभावनाओं को खोजने के लिए चर्चा की। इस चर्चा का आयोजन ‘पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेंट’ और आल इंडिया क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक फोरम ने किया। भारतीय समाज में ईसाई - विकास एवं चुनौतियां विषय पर आयोजित चर्चा में चर्च आॅफ नार्थ इंडिया, मैथोडिस्ट चर्च, रोमन कैथोलिक चर्च, बपतिस चर्च के आलावा स्वतंत्र धर्म प्रचारकों और विभिन्न चर्चो के पादरियों, बिशपों एवं आम मसीहियों ने हिस्सा लिया।

चर्चा की शुरुआत करते हुए ‘पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेंट के अध्यक्ष आर.एल.फ्रांसिस ने कहा कि आज ईसाई समाज कठिन दौर से गुजर रहा है। सरकार और चर्च नेतृत्व दोनो को ही इनकी कोई चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि आज समाज में हमें हाशिए पर धकेल दिया गया है। गरीबी और बेरोजगारी हम में सब से ज्यादा है सरकार अल्पसंख्यकों के नाम पर बनाई जा रही योजनाओं का लगातार ढोल पीट रही है परन्तु ईसाई समाज को इसका कोई लाभ नही मिल रहा।

आर.एल.फ्रांसिस ने कहा कि आज ईसाई समाज को अपने में आत्म-मंथन करने की जरुरत है। चर्च के पास हजारों स्कूल, कालेज, अस्पताल एवं अन्य संस्थान है। शिक्षा के क्षेत्र में हमारा बड़ा हिस्सा होने के बावजूद हमारे बच्चे अशिक्षित एवं मजदूरी जैसे कार्यो में लगे हुए है। फ्रांसिस ने कहा कि चर्च के पास विशाल संसाधनों का भंडार है लेकिन उसका उपयोग मुठ्ठीभर लोग अपने स्वार्थो के लिए कर रहे है। चर्च संपतियों और चर्च की जमीनों को लगातार बेचा जा रहा है। इस पर रोक लगाए जाने की जरुरत हैं

‘पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेंट के अध्यक्ष आर.एल.फ्रांसिस ने कहा कि हर धर्म की संपतियों के मामले में कानून है। सिख समाज के लिए गुरुद्ववारा प्रबंधक अधिनियम बनाया गया है। मुसिलम समाज के लिए वकफ अधिनियम है। हिन्दु समाज के बड़े मंदिर देवा आस्थनम अधिनियम के तहत चालए जा रहे है। ईसाई समाज में ऐसा कोई कानून न होने के कारण स्वार्थी लोग चर्च संपतियों की लूट में लगे है, ईसाई समाज की इन संपतियों को बचाने के लिए केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकारे कारगर कानून लागू करे।

आल इंडिया क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक फोरम के संयोजक जार्ज टोम्स एडवोकेट ने कहा कि दिल्ली में हमारी आबादी बारह लाख से भी ज्यादा है, इतनी संख्या में होने के बावजूद राजनीति क्षेत्र में हमारी कोई पूछ नही है। कांग्रेस समझती है कि दिल्ली के ईसाइयों का वोट उसकी जेब में है और दूसरे समझते है कि इनका वोट हमें मिलेगा ही नही। जार्ज टोम्स ने कहा कि अब वह दिन लद गए जब ईसाई आँख बंद करके काग्रेस को वोट देते थे अब वह यह भी जानना चाहते है कि दिल्ली में पिछले 15 वर्षो से राज कर रही काग्रेस ने उनके लिए क्या किया है। उन्होने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा चलाई जा रही अधिक्तर योजनाओं का लाभ मुसिलम और सिख समुदाय तक ही सीमित है। ईसाई समाज को इसका कोई लाभ नही मिला ।

चर्च ऑफ नार्थ इंडिया के पास्टर टिमोथी शाह ने ने कहा कि चर्चो को गरीब ईसाइयों के विकास के लिए आगे आना चाहिए। डा. आशीष कुमार मैसी पूर्व अध्यक्ष उतर प्रदेश अल्पसंयख्यक आयोग ने ईसाई युवाको को अपने रोजगार शुरु करने और अपने अधिकारों के लिए संगठित होने का आह्रवान किया। चर्च ऑफ एग्लिकन अमृतसर आर्च डायसिस के बिशप रोकस संधू ने कहा कि आज भारत का ईसाई समुदाय असुरक्षा के महौल में जी रहा है जो किसी भी सभ्य देश के लिए चिंता की बात है। सरकार ईसाई समाज में पनप रही असुरक्षा को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाये।

कार्यक्रम को श्रीमती सिंधिया कुमार, रैव्ह.अश्विनी कुमार, अर्नाल्ड जेम्स पूर्व सदस्य दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग, श्रीमती रजनी जार्ज, फादर विल्यिम प्रमदास चैधरी एवं अन्य ने भी सम्बोधित किया।
Posted by jasika lear, Published at 04.32

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