व रोजा इफ्तार में शिया सुन्नी समेत मुसलमानों के सभी फिरकों व बड़ी
तादात में हिन्दू भी शामिल हुए। इस अवसर पर सूफी उबैर्दुरहमान की इमामत
में देश में अमन व शांति की दुआ की गयी। रोजेदारों ने अल्लाह के बार गाह
में हाथ बुलंद करके दुआ की कि प्रदेश की जेलों में आतंकवाद के नाम पर बंद
बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों की रिहाई हो और खुदा इसके लिए सूबे के
हुक्मरानों को सद्बुद्धि दे जिन्होने इन मुस्लिम बेगुनाह नौजवानों को
छोड़ने के वादे के साथ ही हुकूमत मे पहुंची है। दुआ में लोगों ने देश में
सभी कौमों के बीच प्यार मोहब्बत और भाईचारे की कामना की। रिहाई मंच ने जो
यह अजीम काम की शुरुआत की है अल्लाह इनके काम का कुबूल फरमाए और हक को
बुलन्दी अता फरमाए, बातिल को पस्त कर दे। हमें उम्मीद की भूखे-प्यासों की
दुआ अल्लाह जरुर कबूल फरमाएगा। खलिद का खून इंसा अल्लाह जरुर रंग लाएगा।
जो बेगुनाह जेलों में बंद है अल्लाह उनके रिहाई का सबब पैदा करे और
गुनाहगारों को सलाखों के पीछे। अजान हाजी फहीम सिद्दीकी ने दी। इस अवसर
पर मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पाण्डेय, आदि योग, विकार रिजवी,
मौलाना ताहिर मदनी, शकील रिजवी सैयद मोईद अहमद, जैद अहमद फारूकी , हरे
राम मिश्र, बाबर नकवी, फैजान मुसन्ना, एहसानुल हक मलिक , मोहम्मद शुऐब,
शिवदास, तारिक शफीक समेत लगभग पांच सौ लोग मौजूद थे।
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