विज्ञापन दो... विज्ञापन दो

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बुरा न मानो होली है...

विज्ञापन दो... विज्ञापन दो

जब आम आदमी रोता हो
मुख्यमंत्री गुस्सा होता हो
या 'कुप्रचार' बीमारी हो
और 'सत्ता' की लाचारी हो
है सब रोगों की एक दवा
विज्ञापन दो... विज्ञापन दो

हर गली सड़क चौराहों पर
''सत्ता विरोध'' का नारा हो
जब भ्रष्टाचार शिरोमणि ही
सरकार को सबसे प्यारा हो
मत 'पुण्य' करो मत 'पाप' करो
बस योजनाओं का 'जाप' करो
प्रत्येक ''विषय'' पर आंख मूंद
विज्ञापन दो... विज्ञापन दो

नदियों पर पुल बंध जायेंगे
ओले, तुषार के खेतों में
पौधे जमकर उग आयेंगे
मेरे शब्दों की ताकत को
कुछ तो समझो कुछ तो मानो
विज्ञापन आर.ओ. बनते ही
बादल पानी बरसायेंगे
माध्यम, आध्यम को भूल 'सखे'
हमको सीधे विज्ञापन दो विज्ञापन दो
(म.प्र. समाचार सेवा, होली न्यूज)

Posted by Unknown, Published at 08.04

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