बांग्लादेशी फोटोग्राफर और 'पाठशाला' के नाम से साउथ एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ फोटोग्राफी चलाने वाले शाहिदुल आलम बताते हैं कि यह तस्वीर अंदर तक बेचैन कर देती है। मानवीय दृष्टि से यह बेहतरीन तस्वीर है। मौत के आलिंगन में लिपटी यह तस्वीर बताती है कि हमारी भावनाएं अभी भी जीवित हैं। यह तस्वीर अपनी तरफ खींचती है और हटने नहीं देती। सपनों में आने वाली तस्वीर संदेश देती है कि, नहीं, अब दोबारा ऐसा नहीं होगा। अख्तर ने इस तस्वीर के बारे में एक लेख लिखा है। इससे पहले यह तस्वीर टाइम मैगजीन में डेविड वॉन ड्रेहले के निबंध के साथ प्रकाशित हो चुकी है।
काबिलेगौर है कि पिछले महीने ढाके के बाहरी इलाके में कपड़ा बनाने की फैक्टरी की इमारत गिर गई थी। सुबह हुए इस हादसे में अब तक मरने वालों की संख्या 1400 के पार हो गई है। जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय वहां काफी भीड़ थी। बांग्लादेश में दुनिया की सबसे ज्यादा कपड़ा फैक्टरियां हैं। पश्चिमी ब्रांडों के लिए यहां सस्ती कीमत पर कच्चा माल मुहैया कराया जाता है। अग्निशामक दस्ते के एक कर्मचारी का कहना है कि ढाका के जिस सावा इलाके में हादसा हुआ, वहां करीब 2000 लोग थे।
टाइम मैगजीन को तस्लीमा ने बताया कि इस तस्वीर के बारे में उनसे काफी सवाल पूछे जा चुके हैं। वह जवाब देते देते थक चुकी हैं, लेकिन अभी तक उन्हें इन दोनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। वह यह भी नहीं जान पाई हैं कि वो कौन थे और उनके बीच में क्या रिश्ता था। इमारत ढहने के बाद उन्होंने पूरा दिन वहां गुजारा, लोगों की लाशें देखीं, उन्हें बुरी तरह से घायल देखा। उनके रिश्तेदारों की आंखों में बुरी तरह से खौफ नुमायां था। दोपहर के लगभग 2 बजे इमारत के मलबे में इन दोनों की लाश दिखी। दोनों मृत थे और आलिंगनबद्ध थे। उनकी कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह से मलबे में दबा हुआ था। युवक की आखों से खून आंसू की तरह बह रहा था।
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