जो काम जाने-माने सर्जन नहीं कर पाए वो काम एक बर्तन बनाने वाले ने कर डाला। सुनकर आश्चर्य जरूर होगा कि अगर सर्जन ऑपरेशन नहीं कर पाए तो बर्तन वाले ने कैसे कर लिया लेकिन यह सच है।
घटना भदोखर थाना क्षेत्र के मटिया गांव की है जहां ननिहाल आई दो साल की बच्ची नीलम का सिर एक सकरे मुंह वाले बर्तन में फंस गया। दरअसल घर पर तिलक की तैयारियां चल रही थीं और तभी कील ठोंकने के दौरान छत का छज्जा नीचे गिर पड़ा।
छज्जे के झटके से बर्तन बच्ची के सिर में जा फंसा। जिसके बाद उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया।
लेकिन घरवाले पहले लखनऊ न जाकर एक बर्तन वाली दुकान पर पहुंच गए। बर्तन व्यवसायी ने सबसे पहले बर्तन के पेंदे को काटकर अलग किया और फिर बर्फ मंगाकर बच्ची के सिर और बर्तन के बीच में भर दी। बाद में बड़ी सावधानी से काटकर बर्तन को बच्ची के सिर से अलग कर दिया गया।
बच्ची अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। लेकिन बर्तन बनाने वाले की इस कारीगरी की चर्चा दूर-दूर तक है। जो भी सुन रहा है वो बस यही कह रहा है कि जिस काम के लिए डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, उसे बर्तन बनाने वाले ने कर दिखाया।
Posted by , Published at 02.35

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