नरसिंहपुर - पराडकर नर्सिंग होम की मान्यता हो रद्द कांग्रेस पार्षदों ने लगाया आरोप, सौंपा ज्ञापन

नरसिंहपुर - पराडकर नर्सिंग होम की मान्यता हो रद्द कांग्रेस पार्षदों ने लगाया आरोप, सौंपा ज्ञापन


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                                       नरसिंहपुर से सलामत खान की रिपोर्ट....


मिलीभगत कर सरकारी राशि हड़पने का मामला... 

अस्पताल और जनपद को नहीं पता बीमारी



नरसिंहपुर। जिले में अपनी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दंभ भरने वाले पराडकर नर्सिंग पर कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया है कि  राज्य जिला बीमारी सहायता के  समकक्ष चिंहित बीमारी एवं निर्धारित दरों का एस्टीमेट देकर लाखों की राशि का भुगतान कराया जा रहा है जिसमें दलाल सक्रिय हैं। जनप्रतिनिधियों ने इस बावत् एक आवेदन जिला कलेक्टर को सौंपा है जिसमें इस मामले से जुड़े अधिकारी सहित पराडकर नर्सिंग होम पर कार्रवाई की मांग की है। 

बीमारी पता नहीं इलाज हो रहा- 

    जानकारी के अनुसार पराडकर नर्सिंग होम एण्ड रिसर्च सेंटर मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के अंतर्गत कार्ड धारक पंजीकृत श्रमिकों के इलाज हेतु अधिकृत एजेंसी है जिसके अंतर्गत राज्य-जिला बीमारी सहायता के समकक्ष चिंहित बीमारी एवं निर्धारित दरों के अनुसार इलाज किया जाता है। विगत वर्षों से उक्त नर्सिंग होम श्रम अधिकारी के साथ मिलकर प्रबंधन ने मात्र नगरपालिका परिषद व नगर पंचायत सीएमओ और जिले में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारियों सहित जनपद पंचायत की अनुशंसा से इलाज करता चला आ रहा है। आरोप यह है कि इस संबंध में सीएमओ तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बीमार के  बीमारी के संबंध में कुछ नहीं जानते और न ही बीमारी से होने वाली राशि के  व्यय के  बारे में इन्हें कुछ पता है। ऐसी परिस्थिति में वर्षों से नर्सिंग होम प्रबंध द्वारा श्रमिक कार्ड धारकों को जिसकी कार्ड की क्षमता मात्र तीस हजार रूपये है उन सैंकड़ों मरीजों को एस्टीमेट देकर इलाज का भुगातन किया जा रहा है जो लाखों में है। 

क्या हैं नियम- 

       श्रमिक कार्ड धारक  को भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार नियोजन एवं सेवा शर्तों का विनियमन अधिनियम 1996 के अंतर्गत होना चाहिए। यदि श्रमिक कार्ड धारक इलाज कराना चाहता है तो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र या जिला चिकित्सालय में इलाज के लिए आये और यदि उक्त शासकीय चिकित्सालय में इलाज संभव न हो तब संबंधित चिकित्सक की अनुश्ंासा पर मेडिकल कॉलेज जबलपुर या कर्मकार मंडल द्वारा अधिकृत अस्पताल में इलाज हेतु रेफर किया जाता है। इसके बाद नर्सिंग होम इलाज के लिए एस्टीमेट बनाकर संबंधित मरीज को देता है जो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा अनुशंसित होकर पुन: संबंधित नर्सिंग होम भेजा जाता है जिससे आगे का इलाज प्रारंभ होता है। इसमें संबंधित जनपद या नगरपालिका द्वारा भुगतान प्रक्रिया अपनाई जाती है। 

दलाल हैं सक्रिय- 

      लगभग 17 जनप्रतिनिधियों में पराडकर नर्सिंग होम के विरूद्ध अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला कलेक्टर सहित मुख्यमंत्री, श्रमायुक्त और सहायक श्रमायुक्त को शिकायती पत्र लिखकर अनियमितताओं की जांच करने की बात कही है। इनका आरोप है कि इस योजना में दलाल सक्रिय हैं जो प्रबंधन और अधिकारियों की मिली भगत से बंदरबाट करने में लगे हुए हैं। पत्र में प्रमुखता से मांग की गई है कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाकर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई और पराडकर नर्सिंग होम एवं रिसर्च सेंटर की मान्यता समाप्त की जावे । 



Posted by Unknown, Published at 03.39

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